अल्फ़ाज़ों मैं वो दम कहाँ जो बया करे शख़्सियत हमारी, रूबरू होना है तो आगोश मैं आना होगा ......... यूँ देखने भर से नशा नहीं होता जान लो साकी, हम इक ज़ाम हैं हमें होंठो से लगाना होगा !!!!!!!!!!
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